हमारी आज की कहानी अपने आप में बहुत सुंदर सीख छुपाए हुए हैं l बड़े बुजुर्गों ने सही कहा है🙏 अति सर्वत्र वर्जते 🙏
अति किसी भी चीज की हो सदा हमारा नुकसान ही करती है i कहते हैं 🙏
एक बार की बात है,हिमालय की पहाड़ियों के बीच एक दिव्य सरोवर था बहुत ही मनोरम आभा थी सरोवर के आसपास के वातावरण की और एक बात जो सरोवर को दिव्य बनाती थी वह यह थी कि सरोवर में जो भी डुबकी लगाता था वह दिव्य रूप धारण कर लेता, यदि पशु पक्षी कोई डुबकी लगाता तो दिव्य मनुष्य बन जाता, यदि कोई मनुष्य डुबकी लगाता है तो देवता बनकर निकलता l इस सरोवर के पास एक पेड़ था अति विशाल उस पर बंदर बंदरिया का जोड़ा रहता था l वह ऐसा रोज देखते थे एक दिन बंदर ने कहा हम दोनों भी डुबकी लगाते हैं l हम दोनों क्यों इस तरह दर-दर भटकते हैं हम भी कोई दिव्य रूप धारण करते हैं l बंदरिया ने कहा ठीक है l
दूसरे दिन दोनों ने डुबकी लगाई और दोनों ही एक सुंदर रूप मे बाहर आए बंदर एक सुंदर पुरुष बन गया और बंदरिया एक सुंदर राजकुमारी दोनों बाहर आए दोनों बड़े खुश बंदरिया ने कहा चलो अब हम अपना जीवन शुरू करते हैं,नए तरीके से नए सिरे से तभी अचानक बंदर ने कहा रुको मैं ऐसा करता हूं मैं एक बार और डुबकी लगाता हूं क्योंकि अगर मैं दोबारा डुबकी लगाऊं तो फिर मैं देवता बन जाऊंगा जब देवता बनूँगा तभी मेरे पास शक्तियां होगी क्योंकि मनुष्य बन कर तो फिर वही मुझे कामकाज करना पड़ेगा तभी तो घर चलेगा रहेंगे कहां घर बनाना पड़ेगा l बहुत कुछ करना पड़ेगा l
बंदरिया ने कहा तुम ऐसा मत करो मैं तुमसे कहती हूं अब डुबकी मत लगाओ जो मिल गया उसे भगवान का आशीर्वाद समझो l और आगे बढ़ो पर बंदर कहां सुनने वाला था उसने का नहीं तुम चुप रहो मैं एक बार तो जरूर डुबकी लगाऊंगा और मैं देवता बनकर निकलूंगा,बंदरिया ने फिर समझाया ऐसा मत करो जो हो गया उसे स्वीकार करके आगे बढ़ो पर बंदर ने उसकी बात नहीं मानी और आखिरकार उसने डुबकी लगा दी और जब वह निकला तो वापस बंदर बनकर अब वह चौंक गया एकदम अपना रूप पहले जैसा देखकर, बंदरिया वहां सुंदर राजकुमारी बनी हुई थी तभी उधर से एक राजकुमार निकल रहा था उसने देखा इतनी सुंदर राजकुमारी अकेली वह बंदरिया बनी राजकुमारी को अपने महल लें गया l और उसने महल मे जाकर राजा से कहा कि मैं इसी राजकुमारी से शादी करूँगा l अब राजकुमारी महल में रहने लगी इधर बंदर बेचारा बहुत उदास कुछ कर ही नहीं सकता था और यह भूल गया था कि सरोवर की यह बड़ी विचित्र बात थी कि अगर जो कोई दो बार डुबकी लगाता तो पहले वाले रूप में ही वापस आ जाता l बंदरिया ने कई बार समझाया था पर बंदर ने उसकी एक नहीं मानी थी l अब बंदर पश्चाताप की आग में जल रहा था l
इधर एक मदारी गुजरा उसने देखा बंदर बैठा है उसने पकड़ लिया डोरी में बांध लिया अब उसको लगा इसको मैं नचाऊँगा और इससे पैसे कमाऊंगा l इत्तेफाक से बंदर को लेकर मदारी उसी जगह पहुंचा जहां बंदरिया राजकुमारी बन कर रह रही थी l वह उसी का महल था मदारी ने महल के बाहर बंदर को नचाना शुरू किया,तो महल के लोग बंदर का नाच देखने निकल पड़े, जब मदारी बंदर को छड़ी से मारता तो सब लोग खूब हँसते और जोर स ताली बजाते l राजकुमारी भी महल के ऊपर खड़ी देख रही थी, उसकी आँखों मे आँसू थे l बंदर ने जैसे ही राजकुमारी को देखा समझ गया ये मेरी बंदरिया है, उसकी आंखों मे भी आँसू आ गये पर अब कुछ नहीं हो सकता था l तभी बंदरिया ने अपनी आवाज़ मे कुछ कहा बंदर समझ गया, और उसने भी कुछ कहा मगर बंदरिया सुनने से पहले अंदर जा चुकी थी l अब मदारी ने सोंचा एक दो दिन और इस राज्य मे रुकता हूँ, अच्छी कमाई हो जाएगी l रात ढले वो राजकुमारी आई बंदर से मिलने और बोली मैंने मना किया था दुबारा मत डुबकी लगाओ लेकिन तुमने मेरी एक न सुनी हम दोनों कितने खुश थे अपने जीवन से मनुष्य बन कर भी हम दोनों अच्छे से रहते l
पर तुम्हारे लालच के कारण ये सब हुआ है l बंदर बहुत लज्जित था आँखों मे आँसू थे बोला कोई नहीं तुमको देख कर मैं बहुत खुश हूँ तुम अपनी जिंदगी अच्छे से जिओ मैं प्रायश्चित करूंगा और भगवान से यही प्रार्थना करूंगा अगले जन्म मे फिर हम दोनों एक साथ रहे l तभी बंदर ने देखा राजकुमारी वहाँ नहीं है वो बाहर आया तो देखा राजकुमारी घोड़े पर सवार थी उसने कहा अब देर मत करो जल्दी मेरे कंधे पर बैठ जाओ हमें सरोवर पहुंचना है l बंदर ने बहुत समझाया पर बंदरिया की जिद के आगे झुक गया राजकुमारी ने घोड़ा दौड़ाया और वो सुबह होते ही सरोवार के पास थी उसने जल्दी से डुबकी लगा दी और वो भी वापस से बंदरिया बन गई l और उसने कहा की तुमको इस हालत मे छोड़कर मैं कैसे महलो का सुख उठा सकती थी जबकि ये जीवन जो हमको मिला था ये इस दिव्य सरोवर की देन थी l अब बाकी जीवन हमदोनो साथ मे गुजारेंगे बंदर के पास कहने को कुछ नहीं था l दोनों साथ मे उसी पेड़ पर चले गये जहाँ दोनों रहा करते है l
सीख 🙏
इस कहानी से हमको दो शिक्षा मिलती है दोनों सीखे हमको बहुत कुछ सिखा गई है l
पहली 🙏ये की हमको अगर भाग्य से कुछ दिव्य अनमोल चीज़े प्राप्त हो तो प्रभू का धन्यवाद देते हुए उसी मे प्रसन्न रहना चाहिए l और अधिक की मांग नहीं रखनी चाहिए क्योंकि🙏 अति सर्वत्र वर्जयेत 🙏अधिक चाह से नुकसान ही होता है, दूसरी सीख 🙏ये की अगर दो लोगों मे कोई एक अधिक धनवान या रूप वान हो जाये, तब भी अपने साथी का साथ नहीं छोड़ना चाहिए क्योंकि जहाँ त्याग है वहीँ सच्चा अनुराग है 🙏और प्रभू जी तो सच्चे प्रेम और त्याग मे ही निवास करते है 🙏ॐ साई राम 🙏
ये कहानी कैसी लगी जरूर कमेंट करियेगा 🙏
शब्द साधना ✍️
ममता प्रकाश 🙏🙏🙏