अहंकार का अंत

अहंकार जब तक रहता है l
मानव अकड़ा ही रहता है l l
” किसी ने सच कहा है,अहंकार मनुष्य के जीवन का वह अंधकार है जो धीरे-धीरे मनुष्य के विवेक और संवेदनाओं को खत्म कर देता है l जब व्यक्ति ज्ञान,धन या पद पर अत्यधिक गर्व करने लगता है और यह भूल जाता है कि हमारा अहंकार क्षणभंगुर है, तब अहंकार मनुष्य को अकेला कर देता है l अहंकार के अनेको मिसाले हमारे पुराणों में मिलती हैं और यही लिखा भी गया है l🙏 रहे ना रावण सम अभिमानी l हिरणयाकश्यप सम वरदानी ll

रावण जैसा विद्वान भी अपने अहंकार के कारण विनाश को प्राप्त हुआ ,कंस दुर्योधन और हिरणयकश्यप सभी का अंत इसीलिए हुआ,क्योंकि उन्होंने स्वयं को सर्वशक्तिमान समझ लिया था l और ईश्वर की सत्ता को नकार दिया था l अहंकार मनुष्य की सबसे बड़ी कमजोरी है l क्योंकि यह उसे सीखने से रोक देती है l जो व्यक्ति मैं और मेरा में उलझा रहता है,वह जीवन के वास्तविक उद्देश्य को समझ ही नहीं पाता,उसके रिश्ते खोखले हो जाते हैं और उसका हृदय कठोर हो जाता है l इसके विपरीत विनम्रता मनुष्य को महान बनाती है, जिस दिन व्यक्ति अपने अहंकार को त्याग कर सत्य प्रेम और करुणा के मार्ग पर चलता है उसी दिन से उसका वास्तविक विकास तय होता है l अहंकार का अंत ही आत्मज्ञान की शुरुआत है l अतः सदैव स्मरण रखना चाहिए कि हम सब ईश्वर की कृपा से ही चल रहे है, हमारा यहाँ कुछ भी नहीं है l जब जीवन में सब बिखरने लगता है तब परमात्मा ही हमारा साथ देता है, जो हमारे हृदय में बसता है l अहंकार को त्याग कर ही हम शांति, संतुलन और सच्चा सुख प्राप्त कर सकते हैंl

सत्य वचन🙏 अहंकार जब मिट जाता है,तब सत्य का दीप जल जाता है lझुकने में जो शक्ति समझे, वही जीवन का सार समझ पाता है l l ॐ साई राम
शब्द साधना ✍️
ममता प्रकाश 🙏🙏🙏

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