महाराज शिवाजी की अपने गुरु संत रामदास में अनन्य भक्ति थी 🙏और सभी संतों में उनकी सम्पूर्ण निष्ठा थी सबका आदर सम्मान करते थे l एक बार की बात है l महराज शिवाजी युद्ध पर गए हुए थे और युद्ध निरंतर चल रहा था l उसी बीच उनको सूचना मिली,कि संत तुकाराम जी यही पास ही ठहरे हुए हैं l शिवाजी को लगा कि संत दर्शन करने जाना चाहिए तो उन्होंने अपने मंत्री को बुलाया और कहा कि मैं दर्शन करने जाऊंगा l तुम ध्यान रखना,और वह महाराज जी के दर्शन करने चले गए शिवा जी जब किन्ही भी संत भगवान के दर्शन करते थे तो राजसी वेश भूषा में नहीं जाते थे l बड़े ही साधारण वेश में दर्शन करते थे l शिवाजी जब संत तुकाराम के पास दर्शन को पहुंचे, संत तुकाराम ध्यान में थे, नाम स्मरण कर रहे थे l
वह चुपचाप उन्हीं के चरणों में बैठ गए, शिवाजी संत दर्शन को आये थे तो अपनी तलवार भी बाहर सैनिक के पास रख दिया था l अंदर परम शांति का अनुभव हुआ l शिवा जी भी शांति से बैठे थे l इधर शत्रुओं में यह खबर फैल गई की शिवाजी संत तुकाराम के दर्शन को गए हैं और वह बिना अस्त्र और शस्त्र के गए हैं l यह समय अच्छा है उनको गिरफ्तार करने का,जब उनके मंत्री को यह बात पता चली तो वह शिवाजी के पास आए वह बोले महाराज निकल चलिए अभी यहां पर शत्रु खेमे से सिपाही आने वाले हैं l शिवा जी कुछ चिंतित तो हुए, पर तुरंत कुछ बोल नहीं पाए, ठीक उसी समय संत तुकाराम जी महाराज ने उनको वहीं बैठे रहने का इशारा किया, शिवाजी बैठ गए आँखे बंद कर ली मंत्री को बाहर ध्यान रखने को बोला, सैनिक बाहर चला गया l
थोड़ी ही देर बाद शत्रु सैनिकों ने धावा बोल दिया,सारे सैनिकों ने पूरी कुटियां छान डाली, लेकिन उनको सिर्फ और सिर्फ तुकाराम जी दिखाई दिए शिवाजी महाराज दिखाई ही नहीं दिए 🙏सभी सैनिक बड़े आश्चर्य में हो गए कि शिवा जी इतनी जल्दी कहाँ चले गए l अंत में निराश हो कर सब वापस चले गए l तब संत तुकाराम जी ने अपने नेत्र खोले, और बोले शिवा अब तुम सुरक्षित हो जाओ पुनः युद्ध करो l शिवाजी पूर्णतया नतमस्तक हो गए आँखों से कृतज्ञता और प्रेम के आँसू बह रहे थे l शिवाजी ने पुनः प्रणाम किया और वापस अपने खेमे लौट गए l संतों का निर्मल स्वभाव और उनकी कृपा होती है🙏 कि जो उनकी शरण में आ जाता है वह उसकी रक्षा स्वयं करते है,और परमात्मा का प्रेम भी ह्रदय में जाग्रत कर देते है l भक्त को जीवन मुक्त कर देते है 🙏यदि जीवन में संत है 🙏तो जीवन वसंत है 🙏
ना संतो में कोई चाह, ना कोई अपेक्षा l ना मान सम्मान की कोई अभिलाषा है l संत ईश्वर का दर्पण है और करुणा प्रेम की परिभाषा है 🙏
सीख 🙏संतों की वाणी सुनिए उनके वचनों पर चलिए 🌹यक़ीन मानिये जीवन महक जायेगा 🙏
शब्द साधना ✍️
ममता प्रकाश 🙏