कहते है जीवन अमूल्य है हम इसका आंकलन केवल अपनी भौतिक सुख सुविधाओं से नहीं कर सकते l जीवन का मूल्यांकन केवल धन, मानप्रतिष्ठा या प्रसिद्धि से नहीं होता है l जब हम स्वयं से यह पूंछे कि क्या हम भीतर से संतुष्ट हैं? अक्सर हम अपनी तुलना दूसरों से करके अपने जीवन को कमतर आंक लेते हैं,जबकि हर व्यक्ति की अपनी अलग यात्रा होती है l श्रीमद् भागवत गीता में भी कहा है 🙏कि व्यक्ति को अपने कर्म पर ध्यान देना चाहिए, फल की चिंता नहीं करनी चाहिए 🙏यदि हम ईमानदारी और सच्चाई से अपने कर्तव्य का निर्वहन करते हैं,तो सही मायने में हमारा जीवन सही दिशा में चल रहा है l जीवन का मूल्यांकन इस बात से भी होना चाहिए कि हमने कितने चेहरों पर मुस्कान लाने का काम किया कितनों का दुख बांटा और कितनी बार सत्य का साथ दिया l सही मूल्यांकन के लिए आत्म चिंतन अति आवश्यक है l
प्रतिदिन कुछ समय स्वयं के साथ अवश्य बिताएं स्वयं से पूछे कि क्या मैंने आज कुछ अच्छा किया, मेरे व्यवहार से किसी को पीड़ा तो नहीं पहुंची,क्या कल से आज कुछ बेहतर किया?यही खुद से किये गए प्रश्न हमें भीतर से जागृत करते हैं l जीवन एक प्रतियोगिता, नहीं बल्कि एक साधना है l जिसमें सफलता केवल बाहरी प्रसिद्धियों से नहीं बल्कि भीतर की शांति से आँकी जाती है l यदि हमारा मन शांत है,विचार सकारात्मक है और हृदय में करुणा और प्रेम है,तो समझिए जीवन सफल है,अंत में बड़ा प्यारा सा निष्कर्ष निकलता है,अपने जीवन को मूल्यांकित करने का 🙏
निष्कर्ष 🌹 अंततः जीवन का सच्चा मूल्यांकन तब होता है जब हम रात को सोते समय संतोष के साथ कह सके कि परमात्मा आज मैंने अपना कर्तव्य अच्छे से निभाया, यह सब आपकी भक्ति और सेवा से हो पाया है l और यही संतुष्टि की सबसे बड़ी उपलब्धि है l जीवन का सही मूल्यांकन तालियों से नहीं बल्कि मन कि शांति से है l जब मन कहे आज कुछ अच्छा किया 🙏कितना कमाया यह नहीं,कितना बांटा और कितनों के चेहरे पर मुस्कान लाने का हम माध्यम बने है 🙏ॐ साईं राम 🙏
शब्द साधना ✍️
ममता प्रकाश 🙏🙏🙏