गृहस्थ जीवन और भक्ति

अक्सर लोगों को लगता है कि भक्ति केवल साधु संतों का मार्ग है, और गृहस्थ जीवन में भक्ति संभव नहीं परंतु सत्य यह है कि सच्ची भक्ति का सबसे सुंदर रूप गृहस्थ जीवन में ही प्रकट होता है lगृहस्थ जीवन जिम्मेदारियां से भरा होता है, परिवार बच्चों की चिंता कामकाज रिश्तों का निर्वाह इन सब के बीच यदि मन प्रभु भक्ति में लगा है तो यही सच्ची साधना है l भक्ति का अर्थ संसार छोड़ना नहीं बल्कि संसार में रहते हुए अपने हृदय को प्रभु के चरणों में स्थिर करना है l इतिहास गवाह है कि अनेकों संत ऐसे हुए हैं जिन्होंने गृहस्थ धर्म का निर्वहन करते हुए भगवान को पा लिया जिनमें से कुछ नाम लेकर मैं अपनी लेखनी को पवित्र कर रही हूं, जैसे संत तुकाराम, संत कबीर दास, संत जना बाई, संत मीराबाई ऐसे अनेकों संत हुए जिन्होंने गृहस्थी धर्म को भी निभाया,और भगवत भक्ति को प्राप्त किया l

उन्होंने सिद्ध किया कि भक्ति के लिए वन या आश्रम जाने की आवश्यकता नहीं है अपितु केवल निर्मल ह्रदय चाहिए l गृहस्थ जीवन हमें त्याग धैर्य और प्रेम सिखाता है l जब हम परिवार की सेवा को ईश्वर की सेवा मान लेते हैं,तब रसोई भी मंदिर बन जाती है l और रोज का कार्य पूजा बन जाता है lबच्चों को सही शिक्षा संस्कार देना माता-पिता का सम्मान करना,जीवनसाथी का साथ निभाना और साधु संतों की सेवा की भावना रखना यही तो( जीवित )भक्ति है l भक्ति और गृहस्थ जीवन विरोधी नहीं बल्कि एक दूसरे के पूरक हैं l यदि मन में श्रद्धा और कर्म में निष्ठा हो, तो घर ही तीर्थ बन जाता है l मानस की चौपाई में एकदम सही उदाहरण मिलता है l🙏सब कै ममता ताग बटोरी lमम पद मनहि बांधि बरि डोरी llइस चौपाई का अर्थ है की माता-पिता भाई,पुत्र, पत्नी, शरीर, घर, मित्र,परिवार आदि के प्रति जो मोह ममता है,उन सभी मोह के धागों को एक जगह समेटकर उनसे मन हटाकर अपने भगवान के चरणों में एकाग्र कर ले l यह संसार से मोह छोड़कर ईश्वर में प्रीति करने का सही मार्ग है l

मतलब सभी कार्य करते हुए अपना हृदय प्रभु को अर्पण करते चले, तो गृहस्थ जीवन भी प्रभु का धाम बन जाएगा lकुछ छोड़ने की जरूरत नहीं, बस प्रभु से मन को जोड़ने की जरूरत है 👏तो गृहस्थ धर्म निभाइए और ईश्वर की भक्ति को प्राप्त कीजिये l ईश्वर हर पल आपके साथ है l 👏
सीख🙏 सेवा हो प्रभू कि हर कार्य करते करते l प्रभू मिल जायेंगे हमको नाम जपते जपते 🙏🙏
शब्द साधना ✍️
ममता प्रकाश 🙏🙏

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