एक शिक्षिका होने के नाते आज नारी शिक्षा पर अपने विचार प्रस्तुत करती हूँ

किसी भी समाज की असली प्रगति उसकी बड़ी-बड़ी ईमारतो या तकनीकियों से नहीं बल्कि उसकी सोच से मापी जाती है l और यह सोच एवं विचारों से तब सशक्त होती है,जब उस समाज की नारी शिक्षित होती है l नारी शिक्षा केवल अक्षरों का ज्ञान नहीं, अपितु नारी की आत्म सम्मान आत्मनिर्भरता और विवेक की जागृति है l एक शिक्षित नारी स्वयं का जीवन ही नहीं सवारती बल्कि पूरी पीढ़ी को दिशा देती है l ऐसा कहा भी जाता है कि पुरुष शिक्षित होता है,तो एक व्यक्ति शिक्षित होता है l लेकिन जब एक नारी शिक्षित होती है तो पूरा परिवार शिक्षित होता है l स्त्री अपने बच्चों की पहली गुरु होती है,उसके विचार उसके संस्कार और उसका व्यवहार आने वाले भविष्य की नींव रखते हैं l नारी शिक्षा से समाज में कई सकारात्मक परिवर्तन आते हैं l शिक्षित महिलाएं स्वास्थ्य के प्रति जागरूक होती है,तो परिवार को संतुलित रखती हैं आर्थिक रूप से योगदान देती हैं, तो वह आत्मनिर्भर बनती है l जिसे उनके द्वारा लिए गए निर्णय मजबूत होते हैं और आत्मविश्वास भी जागृत होता है l अक्सर देखा गया है कि जब एक बेटी पढ़ती है,तो पूरा परिवार बढ़ता है l शिक्षित मां अपने बच्चों में अच्छे संस्कार डालती है l समाज को नई दिशा देती है l और राष्ट्र निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है l नारी शिक्षा से बाल विवाह, शिक्षा अंधविश्वास और सामाजिक कुरीतियों पर भी अंकुश लगता है l हमें यह समझना होगा की बेटी को पढ़ाना कोई उपकार नहीं, बल्कि समाज का कर्तव्य है l🙏जब हम एक नारी को शिक्षा देते हैं तो केवल एक व्यक्ति को नहीं बल्कि आने वाले कल को भी हम सशक्त बनाते हैं l
अपने इन्हीं विचारों के साथ हम संकल्प लें 🙏कि हर बेटी को पढ़ने का अवसर मिलेगा,हर नारी को बढ़ने का अवसर मिलेगा,तभी हमारा समाज वास्तव में विकसित कहलाएगा l🙏
शब्द साधना की कलम से ✍️
ममता प्रकाश 🙏🙏

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