संतों की वाणी से संत तुकाराम जी की कथा ( भक्ति की कसौटी )

हृदय गदगद हैं,आंखें नम है,जो ऐसे दिव्य संतों की वाणी उनकी कथा लिखने का सौभाग्य मिल रहा है l यह सब श्री साईं नाथ की कृपा और आशीर्वाद से ही संभव हो पाया है l शब्द साधना ब्लॉग में एक और दिव्य अध्याय जुड़ रहा है l
श्री संत तुकाराम जी महाराष्ट्र के महान संत थे l वे विट्ठल (भगवान कृष्ण) के अनन्य भक्त थे l जिनके अभंग वाणी के माध्यम से जन-जन तक भक्ति का प्रकाश फैलाते थे,श्री तुकाराम जी का जीवन सादगी, त्याग और ईश्वर प्रेम का जीता जागता उदाहरण था l आज भी है हमेशा रहेगा🙏 ऐसा कहते हैं तुकाराम जी दिन-रात विट्ठल का नाम जपते थे l उनकी वाणी इतनी सरल और सच्ची थी कि आम जन उन्हें सुनकर भाव विभोर हो जाते, पर वहीँ कुछ पंडित,विद्वान और समाज के लोग उनसे ईर्ष्या करने लगे,उन्होंने कहा यह अनपढ़ व्यक्ति कैसे हमारे शास्त्रों की बातें हमारे सामने कर सकता है l और ईर्ष्या इतनी बढ़ गई कि उन्होंने एक दिन तुकाराम जी से कहा यदि उनकी वाणी सच्ची है, तो वह अपने लिखे अभंग नदी में प्रवाहित कर दें,यदि अपने भगवान पर इतना भरोसा है, तो वे स्वयं लौटा देंगे 🙏तुकाराम जी ने कोई प्रतिवाद नहीं किया,और अपने सारे अभंग इंद्राणी नदी में अर्पित कर दिए l उनकी आंखें आंसुओं से भरी थी पर मन में कोई शिकायत नहीं थी,उन्होंने बस इतना ही कहा, विट्ठल सब कुछ तुम्हारा ही तो है l इसके बाद तुकाराम जी नें नदी के किनारे बैठकर तीन दिन तक निरंतर विट्ठल नाम का जप किया,न भोजन,न पानी की चिंता ना अपमान का दुख केवल समर्पण पूर्ण समर्पण तीन दिन के भीतर चमत्कार हुआ l श्री विट्ठल ने तुकाराम जी को दर्शन दिया 🙏और बोले दुखी मत हो तुम्हारे सारे अभंग ज्यों के त्यों मेरी गोद में सुरक्षित है 🙏 और विट्ठल ने सारे अभंग वापस कर दिए तुकाराम जी एकदम भाव विभोर होकर विट्ठल विट्ठल जपे जा रहे थे l आंखों में निरंतर अश्रु प्रवाह हो रहा था जिन लोगों ने नदी में प्रवाह करने के लिए बोला था, वे सब आश्चर्यचकित थे कि सारे अभंग नदी के किनारे सुरक्षित आ गए, एकदम सूखे जैसे किसी ने रख दिया हो,वे सारे लोग तुकाराम जी की भक्ति के आगे नतमस्तक हो गए 👏और बार-बार क्षमा मांगते रहे l तब तुकाराम जी ने कहा भगवान को पाने के लिए विद्या का अहंकार नहीं केवल शुद्ध भक्ति चाहिए 🙏
निष्कर्ष🙏 यह कथा हमें सिखाती है कि जब मन पूर्ण रूप से प्रभु को समर्पित हो जाए, तो संसार की कोई भी परीक्षा हमें डिगा नहीं सकती,सच्ची भक्ति अंततः स्वयं ईश्वर की साक्षी बन जाती है l 🙏कोटि कोटि नमन संत तुकाराम जी के चरणों में 🙏🙏
शब्द साधना ✍️
ममता प्रकाश

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