कर्म का रहस्य 🙏

जैसा बोवोगे वैसा काटोगे 🙏🙏
कहते हैं मनुष्य के जीवन में जो कुछ भी घटित होता है, वह अचानक नहीं होता हर सुख, हर दुख और हर परिस्थिति के पीछे हमारे ही कर्मों की छाया होती है l कर्म का यही रहस्य है,कि हम जो आज कर रहे हैं,वही कल हमारा भाग्य बनकर हमारे सामने आता हैl
कर्म का अर्थ केवल बाहरी क्रियाएं ही नहीं होती बल्कि हमारे विचार शब्द और भावनाएं भी कर्म ही है l जब हम मन में द्वेष, ईर्ष्या या क्रोध पालते हैं,तब भी हम कर्म ही कर रहे होते हैं,और जब हम प्रेम,करुणा और क्षमा का भाव रखते हैं,तब भी कर्म का ही बीज बो रहे होते है l फर्क केवल इतना ही है,कि कौन सा बीज भविष्य में कांटे बनकर उगेगा और कौन सा फूल बनकर,?
अक्सर मनुष्य प्रश्न करता है, कि मैं सबके साथ अच्छा करता हूं, फिर मेरे साथ बुरा क्यों होता है l इसका उत्तर कर्म के गूढ रहस्य में ही छिपा है l कई बार वर्तमान का दुख हमारे पिछले कर्मों का फल होता है l और आज के अच्छे कर्म भविष्य में सुख बनकर लौटते हैं,कर्म का फल तुरंत नहीं,सही समय पर मिलता है l
ईश्वर कर्मों का न्यायाधीश नहीं बल्कि साक्षी है 🙏वह हमें दंड या पुरस्कार नहीं देता बल्कि हमारे कर्मों को ही हमारे पास लौटा देता है l जैसे बीज बोने के बाद किसान धैर्य रखता है l वैसे ही कर्म का फल भी समय लेकर आता है l
कर्म का रहस्य हमें यह भी सिखाता है,कि परिस्थितियों को दोष देने से बेहतर है अपने कर्म सुधारना,जब हम परिणाम की चिंता छोड़कर, निष्काम भाव से जब कर्म करने लगते हैं तब जीवन हल्का होने लगता है l श्रीमद् भागवत में भी यही लिखा है 🙏कर्म करो फल की इच्छा मत करो🙏
जब मनुष्य अपने कर्मों की जिम्मेदारी लेना सीख लेता है, तब वह पीड़ित नहीं, बल्कि साधक बन जाता है l सही कर्म, सही भाव और सही दिशा, यही जीवन को पवित्र बनाते हैं l अंत में निष्कर्ष यही है 🙏
कर्म से कोई बच नहीं सकता लेकिन कर्म को शुद्ध करके जीवन अवश्य बदला जा सकता है l आज का किया कर्म ही आने वाले कल की सबसे बड़ी पूंजी है 👏
शब्द साधना की लेखनी से👍
ममता प्रकाश 🙏

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This Post Has One Comment

  1. Sudha Bisht

    Tooo good maam

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