आज का युग कलयुग यानी मशीनी युग है, और ये युग मोबाइल और सोशल मीडिया का है l हर पल नोटिफिकेशन,तुलना और दिखावा मन की शांति कहीं खोती सी जा रही है l पर ऐसे कलयुगी समय में भक्ति ही है,जो हमें याद दिलाती है कि जो अंदर से जुड़ा है उसे बाहर का शोर हिला नहीं सकता, भक्ति का अर्थ केवल मंदिर जाना नहीं भक्ति का अर्थ है भीड़ में रहकर भी अपने हृदय में अपने प्रभु का चिंतन बनाए रखना,प्रभु से खुद को जोड़े रखना l सुबह आंख खुलते ही हम सबसे पहले मोबाइल देखते हैं, रात को भी मोबाइल देखकर सोते हैं l इन्हीं आदतों कि वजह से धीरे-धीरे हमारा मन बाहरी दुनिया के शोर में उलझता जा रहा है l प्रतिस्पर्धा तुलना और दिखावे कि दौड़ में हमारी शांति कहीं पीछे छूटती जा रही है l पर भक्ति हमें अलग मार्ग दिखाती है l
भक्ति कहती है बाहर कितना भी शोर क्यों न हो,भीतर मौन बनाये रहो सच्ची शांति लाइक्स और फॉलोअर्स में नहीं बल्कि उस जुड़ाव में है,जो हमें ईश्वर से मिलता है l डिजिटल दुनिया में रहना गलत नहीं पर उसमें खो जाना ठीक भी तो नहीं है l हमें साधन का उपयोग करना है,स्वयं साधन नहीं बन जाना है, बल्कि जीवन को अगर साधना की तरफ ले जाएं तो जरूर संतुलन बना रहेगा l भक्ति हमें याद दिलाती है की असली कनेक्शन वाईफाई से नहीं विश्वास और श्रद्धा से बनता है, जब हृदय प्रभु के साथ जुड़ता है,तब अकेलापन भी साधना बन जाता है, जब दुनिया लाइक्स गिन रही हो तब हम आशीर्वाद गिन लें,लेकिन जब दुनिया हमारी तुलना करें तब हम कृतज्ञता जाहिर करें l एक छोटी सी आदत जरूर अपनाएं दिन में 5 मिनट फोन साइड में रखकर बस प्रभु का ध्यान कर ले,नाम स्मरण कर लें,देखिएगा मन में कितनी शांति उतरने लगेगी, डिजिटल दुनिया से थोड़ा अलग होकर देखें अंदर बैठा ईश्वर हर समय ऑनलाइन मिलेगा l 👏👏
जरूर अपनाएं 👍
🌹 थोड़ा समय खुद को दीजिए,
🌹 थोड़ा समय अपने प्रभु को दीजिए, यक़ीन मानिये जीवन मुस्कुरा उठेगा 🙏 जो भीतर जाग गया उसे बाहर की भीड़ भटका नहीं सकती 🙏🙏
ईश्वर सदैव आपके साथ रहे 👏👏👏
शब्द साधना ✍️
ममता प्रकाश 🙏🙏🙏
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