आज की शिक्षा सबसे बड़ी चुनौती है 👏आज के इस विचार पर आप सबके साथ मैं अपने विचार साझा करती हूंl
माता-पिता और शिक्षकों के लिए आज संस्कारों के साथ शिक्षा देना एक चुनौती बनता जा रहा है आज का युग डिजिटल युग है l मोबाइल, इंटरनेट और सोशल मीडिया ने जहां ज्ञान के नए द्वार खोले हैं,वहीं बच्चों के सामने एक बड़ी चुनौती भी खड़ी कर दी हैl आज के बच्चे किताबों से ज्यादा मोबाइल स्क्रीन से जुड़े रहना चाहते हैं l ऐसे में यह प्रश्न बहुत महत्वपूर्ण हो गया है, कि आज बच्चों को कैसे पढ़ाये, सोशल मीडिया से कैसे बचाएं,
👍 सर्वप्रथम तो यह समझना जरूरी है कि बच्चों को सोशल मीडिया से पूरी तरह दूर रखना संभव नहीं हैl लेकिन उसे नियंत्रित और सही दिशा में जरूर रखा जा सकता हैl इसके लिए शिक्षकों के साथ-साथ माता-पिता की भूमिका भी बहुत अहम हो जाती है l
बच्चों के लिए एक निश्चित समय सारणी बनाना बहुत जरूरी हैl जिसमें पढ़ाई, खेल उनका आराम, और मोबाइल हर चीज का समय तय होना चाहिए जब बच्चों को पता होता है l कि मोबाइल का समय सीमित है,तो वह पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करते हैंl आज कई माता-पिता बच्चों को चुप कराने,या उन्हें खाना खाने में व्यस्त रहने के लिए मोबाइल दे देते हैंl यही आदत धीरे-धीरे एक समस्या का रूप ले लेती है,मोबाइल को इनाम या समय काटने का साधन न बनाकर जरूरत और सीख का माध्यम बनाएं l
👏 बच्चे वही सीखते हैं जो देखते हैं अगर माता-पिता स्वयं मोबाइल में हर समय व्यस्त रहते हैं l तो बच्चों से मोबाइल छोड़ने की उम्मीद करना बिल्कुल गलत हैl 🙏अंत में( निष्कर्ष )के रूप में मैं बस यही कहना चाहूंगी, कि आज के बच्चों का पढ़ाई की ओर ध्यान केंद्रित करने के लिए सख़्ती से ज्यादा प्रेम धैर्य और समझदारी की जरूरत हैl सही मार्गदर्शन, सीमित सोशल मीडिया और सकारात्मक वातावरण से ही हम बच्चों का भविष्य उज्ज्वल बना सकते हैंl🙏
कृपया अपने विचारों से भी अवगत कराए, आपको आज का यह लेख कैसा लगा🙏 धन्यवाद ओम साईं राम 🙏🙏🙏
आज की बेटियों का दर्द
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